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IndiGo संकट: हज़ारों फ्लाइट कैंसिल, ₹610 करोड़ रिफंड, सरकार सख्त मोड में

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HIGHLIGHTS
  1. IndiGo ने यात्रियों को ₹610 करोड़ से ज्यादा का रिफंड किया
  2. देशभर में अब तक 3,000 से ज्यादा बैगेज लौटाए गए
  3. DGCA ने किरायों पर लिमिट लगाई और जांच पैनल बनाया
  4. 10 दिसंबर तक फ्लाइट ऑपरेशन नॉर्मल होने का दावा

 

देश का सबसे बड़ा एयरलाइन नाम जब अचानक खबरों में आए, तो वजह किसी नई स्कीम की नहीं बल्कि IndiGo flight cancellations जैसी बड़ी परेशानी की होती है। रविवार शाम तक हालात ऐसे रहे कि यात्री टिकट, बैगेज और समय—तीनों को लेकर परेशान दिखे। स्थिति संभालने के लिए इंडिगो को जेब ढीली करनी पड़ी और अब तक करीब ₹610 करोड़ का रिफंड यात्रियों को लौटाया जा चुका है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि 3,000 से ज्यादा बैगेज भी यात्रियों को वापस सौंप दिए गए हैं। कहा जा सकता है कि सूटकेस अपने मालिकों से मिले, लेकिन देरी के बाद।


रिफंड और री-बुकिंग: बिना एक्स्ट्रा चार्ज का वादा

यात्रियों को राहत देते हुए मंत्रालय ने साफ कर दिया कि रिफंड या री-बुकिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। एयरलाइन की ओर से देशभर में स्पेशल सपोर्ट सेल बनाए गए हैं ताकि गुस्से में फोन करने वाले यात्रियों को कम से कम कॉल पर संतोष मिल सके।

सपोर्ट सेल के मुख्य काम इस प्रकार बताए गए हैं:

यानी अब “कृपया लाइन पर बने रहें” वाला जवाब थोड़ा कम सुना जा सकता है।


फ्लाइट ऑपरेशन में सुधार का दावा, लेकिन ज़मीन पर तस्वीर अलग

इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स के अनुसार एयरलाइन रविवार को 138 में से 137 डेस्टिनेशंस पर 1,650 फ्लाइट्स ऑपरेट कर रही है। अनुमानित ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 75% रहने की बात कही गई।

तुलनात्मक आंकड़े कुछ यूं रहे:

दिन ऑपरेटेड फ्लाइट्स कैंसिल फ्लाइट्स
शुक्रवार ~700 ~1600
शनिवार ~1500 ~800
रविवार ~1650 650+

आम दिनों में इंडिगो करीब 2,300 फ्लाइट्स रोजाना उड़ाती है। ऐसे में 650 से ज्यादा फ्लाइट्स का कैंसिल होना मामूली बात नहीं मानी जा सकती।


कहाँ-कहाँ सबसे ज़्यादा असर पड़ा

दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, हैदराबाद, भोपाल, मुंबई और त्रिची जैसे बड़े शहरों से जाने वाली फ्लाइट्स बार-बार कैंसिल हुईं। कोलकाता एयरपोर्ट पर अकेले इंडिगो की 76 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

प्रमुख एयरपोर्ट्स की स्थिति:

यात्रियों के लिए एयरपोर्ट किसी ट्रांजिट पॉइंट से ज्यादा पिकनिक स्पॉट बनता नजर आया, फर्क बस इतना कि मज़ा कम और थकान ज्यादा थी।


किरायों में आग, सरकार ने लगाई पानी की बौछार

फ्लाइट कैंसिल होने से बाकी एयरलाइंस ने किरायों को आसमान पर पहुंचा दिया। इसे देखते हुए सरकार ने सख्ती दिखाई और किराया सीमा तय कर दी।

नई किराया लिमिट इस प्रकार है:

बिजनेस क्लास को इस सीमा से बाहर रखा गया है, क्योंकि वहां दर्द सिर्फ जेब का होता है।


DGCA के आदेश और टाइमलाइन

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने इंडिगो को साफ निर्देश दिए हैं:

जवाब न मिलने पर DGCA एकतरफा फैसला ले सकता है।


जांच पैनल और 15 दिन की डेडलाइन

DGCA ने चार सदस्यों की जांच समिति बनाई है। पैनल में सीनियर फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स और जॉइंट DG शामिल हैं। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी और आगे की कार्रवाई सुझाएगी।

इस कदम का मकसद साफ है—गलती किसकी थी, सिस्टम की या सिर्फ टाइमटेबल की।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने किराया नियंत्रण का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक एयरलाइन सेक्टर में दो कंपनियों का दबदबा है, तब तक कीमतों पर लगाम जरूरी है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंडिगो संकट ने दिखा दिया कि एयरलाइन, मंत्रालय और रेगुलेटर—तीनों जिम्मेदारी निभाने में पिछड़ गए।


पायलट ड्यूटी नियम: असली जड़

DGCA ने 1 नवंबर से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) के नए नियम लागू किए थे। इन नियमों का मकसद क्रू को ज्यादा आराम देना था, लेकिन परिणामस्वरूप इंडिगो के पास स्टाफ की कमी हो गई।

इंडिगो के अनुसार:

सरकार ने बाद में अस्थायी राहत दी, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।


क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की एंट्री

इंटरग्लोब एविएशन ने स्थिति संभालने के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बनाया है। इसमें चेयरमैन, बोर्ड डायरेक्टर्स और CEO शामिल हैं।

ग्रुप का काम:

यानि अब मीटिंग्स हवा में नहीं, बल्कि ज़मीन पर असर दिखाने के लिए हैं।


यात्रियों की असली परेशानी

कई यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने के बाद कैंसिलेशन की जानकारी मिली। चंडीगढ़ में एक नेपाली पर्यटक तीन दिनों से फंसा रहा। ऐसी कहानियां सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी दिखाती हैं।


FAQ

सवाल 1: इंडिगो ने अब तक कितना रिफंड दिया है?
₹610 करोड़ से ज्यादा।

सवाल 2: फ्लाइट ऑपरेशन कब तक नॉर्मल होंगे?
इंडिगो का दावा है कि 10 दिसंबर तक स्थिति स्थिर हो जाएगी।

सवाल 3: क्या भविष्य में किराया सीमा लागू रहेगी?
सरकार ने फिलहाल इकोनॉमी क्लास के लिए लिमिट तय रखी है।

सवाल 4: DGCA की जांच रिपोर्ट कब आएगी?
15 दिनों के भीतर।


निष्कर्ष

इंडिगो संकट ने यह साफ कर दिया कि बड़ी एयरलाइन होना काफी नहीं, सिस्टम मजबूत होना भी जरूरी है। यात्रियों का भरोसा जीतना सिर्फ सस्ती टिकट से नहीं, बल्कि समय पर उड़ान और सही जानकारी से होता है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में हालात सुधरेंगे और एयरपोर्ट दोबारा सिर्फ ट्रैवल की जगह बनेंगे, इंतजार की नहीं।

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