- दिल्ली हाईकोर्ट ने IndiGo संकट पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
- टिकट कीमतें 4-5 हजार से बढ़कर 30,000 तक पहुंचने पर सवाल उठे।
- DGCA और IndiGo के CEO की भूमिका जांच के दायरे में आई।
- सरकार ने IndiGo की 10% उड़ानों में कटौती का आदेश दिया।
Delhi High Court में बुधवार का दिन इंडियन एविएशन सेक्टर के लिए बिल्कुल भी हल्का नहीं रहा। IndiGo crisis जैसे छोटे लेकिन बेहद असरदार keyword के साथ अगर कोई खबर ढूंढी जाए, तो इस दिन की सुनवाई सबसे ऊपर दिखेगी। अदालत ने सीधा-सादा सवाल पूछा—जब इंडिगो की उड़ानें ताश के पत्तों की तरह गिर रही थीं, तब सरकार क्या कर रही थी?
अदालत के तेवर देखकर ऐसा लग रहा था मानो जज साहब भी किसी canceled flight के यात्री रह चुके हों।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की डिविजन बेंच जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका का मकसद साफ था—इंडिगो संकट की स्वतंत्र न्यायिक जांच और परेशान यात्रियों को मुआवजा। कोर्ट ने साफ कहा कि मामला सिर्फ कुछ यात्रियों की असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
टिकट के दाम: 5,000 से 30,000… ये जादू कैसे हुआ?
हाईकोर्ट की सबसे तीखी टिप्पणी टिकट कीमतों को लेकर आई। न्यायालय ने पूछा कि जिस टिकट की कीमत 4-5 हजार रुपए थी, वह अचानक 30,000 तक कैसे पहुंच गई।
यह सवाल सुनते ही शायद कई यात्रियों ने सोचा होगा—“कम से कम अब कोई तो पूछ रहा है!”
दूसरी एयरलाइंस पर भी अदालत की नजर गई। सवाल उठा कि क्या बाकी एयरलाइंस ने इस संकट का फायदा उठाकर किराए बढ़ा दिए। अदालत का इशारा साफ था—कहीं न कहीं सिस्टम ने यात्रियों को अकेला छोड़ दिया।
सरकार से सीधा सवाल-जवाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट और सरकार के बीच बातचीत किसी सख्त इंटरव्यू से कम नहीं थी।
कोर्ट: सरकार से क्या उम्मीद रखें?
याचिकाकर्ता: फ्लाइट रद्द होने की संख्या अब कुछ कम हुई है।
कोर्ट: अब आगे क्या चाहते हैं?
एएसजी चेतन शर्मा: सरकार ने किराए पर कैप लगाया है।
कोर्ट: यह कैप 4-5 दिन बाद क्यों लगा?
कोर्ट का सवाल सीधा था—जब हालात बिगड़ रहे थे, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जवाब घूम-फिर कर आया, लेकिन सवाल वहीं खड़ा रहा।
DGCA भी जांच के घेरे में
इस बार सिर्फ एयरलाइन नहीं, बल्कि रेगुलेटर DGCA भी सवालों से नहीं बच पाया। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने खुद कहा कि इंडिगो की गड़बड़ी में DGCA की भूमिका की भी जांच होगी।
मंत्री का बयान सुनकर एविएशन सेक्टर में हलचल तेज हो गई।
मंत्री ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक “सामान्य गलती” नहीं लगती, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही के संकेत मिलते हैं।
CEO की कुर्सी भी हिलती नजर आई
इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को DGCA ने समन भेजकर गुरुवार दोपहर बुलाया। CEO को हटाने के सवाल पर मंत्री नायडू ने साफ कहा—“जरूरत पड़ी तो जरूर हटाया जाएगा।”
यह बयान सुनकर एविएशन इंडस्ट्री में कई कुर्सियां शायद सीधी होकर बैठ गई होंगी।
मंत्री ने खुद माना कि पिछले 7 दिनों से वह लगातार मीटिंग कर रहे हैं और ठीक से सो भी नहीं पाए। वजह साफ थी—यात्रियों की परेशानी कम करना।
संख्याओं में छुपी असल कहानी
DGCA की रिपोर्ट ने संकट की जड़ दिखा दी। इंडिगो ने कागजों में 403 विमान दिखाकर 6% ज्यादा उड़ानों का विंटर शेड्यूल ले लिया।
हकीकत थोड़ी अलग निकली।
| माह | बताए गए विमान | वास्तविक उड़ानें |
|---|---|---|
| अक्टूबर | 403 | 339 |
| नवंबर | 403 | 344 |
नवंबर में 64,346 शेड्यूल्ड फ्लाइट्स में से सिर्फ 59,438 उड़ानें चल पाईं। करीब 4,900 फ्लाइट्स हवा में उड़ने से पहले ही जमीन पर रुक गईं।
विंटर शेड्यूल और बढ़ता दबाव
सर्दियों में पहले ही खराब मौसम, कोहरे और तकनीकी बाधाओं का दबाव रहता है। ऐसे समय में इंडिगो ने पिछले साल के मुकाबले 9.66% ज्यादा उड़ानें ले लीं।
पर क्षमता उतनी थी ही नहीं।
इस फैसले से सिस्टम पर अतिरिक्त बोझ पड़ा और नतीजा सामने आया—कैंसिलेशन, देरी और यात्रियों का गुस्सा।
सरकार का बड़ा कदम: 10% उड़ानों में कटौती
सरकार ने आखिरकार सख्त कदम उठाते हुए इंडिगो की 10% उड़ानों में कटौती का आदेश दिया।
इसका सीधा असर हाई-डिमांड रूट्स पर पड़ा, जहां रोजाना चलने वाली लगभग 230 फ्लाइट्स कम हो गईं।
DGCA ने कंपनी को नया शेड्यूल जमा करने का निर्देश दिया। हालात इतने खराब हो चुके थे कि सिर्फ 8 दिनों में देशभर में लगभग 5,000 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं।
पायलट थकान और सुरक्षा का सवाल
इंडिगो संकट ने पायलट थकान जैसे पुराने मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया। ALPA इंडिया को संसद की स्थायी समिति ने पायलट थकान, FDTL नियम और सेफ्टी रिस्क पर अपनी बात रखने के लिए बुलाया।
एसोसिएशन का कहना है कि कई एयरलाइंस नए नियमों को सही तरीके से लागू नहीं कर रही हैं, जिससे पायलटों पर दबाव बढ़ रहा है।
कैप्टन रंधावा ने खोली पोल
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने साफ आंकड़ों के साथ स्थिति रखी।
इंडिगो के पास 360 एयरबस A320 विमान हैं, जिनमें से करीब 80 इंजन रिपेयर के चलते ग्राउंडेड थे।
एक छोटे से गणित ने सारी कहानी बता दी:
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हर विमान के लिए कम से कम 14 पायलट जरूरी
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कुल जरूरत: 4,480 पायलट
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उपलब्धता: इससे कम
कई बार पायलट एयरपोर्ट पहुंचे, रिपोर्टिंग पूरी की, लेकिन विमान ही मौजूद नहीं थे। यह स्थिति किसी कॉमेडी फिल्म जैसी लग सकती है, लेकिन यात्रियों के लिए यह बिल्कुल मजाक नहीं थी।
10 बड़े एयरपोर्ट पर IAS अधिकारियों की तैनाती
केंद्र सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए 10 बड़े एयरपोर्ट पर सीनियर IAS अफसर तैनात किए।
इन अफसरों को यात्रियों की परेशानियों का फीडबैक लेने और जमीनी हकीकत समझने की जिम्मेदारी दी गई।
इन एयरपोर्ट्स में शामिल हैं:
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मुंबई
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बेंगलुरु
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दिल्ली
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हैदराबाद
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चेन्नई
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कोलकाता
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अहमदाबाद
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पुणे
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गुवाहाटी
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गोवा
15 दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
सिविल एविएशन सेक्रेटरी समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि पूरी जांच 15 दिनों में पूरी की जाएगी।
रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
सरकार का दावा है कि इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई होगी।
इंडिगो का जवाब: वजह अभी साफ नहीं
इंडिगो ने DGCA को दिए जवाब में कहा कि ऑपरेशनल दिक्कतों की असली वजह फिलहाल तय करना मुश्किल है।
कंपनी ने समय मांगा और कहा कि पूरा रूट कॉज एनालिसिस करने के लिए 15 दिन चाहिए।
एयरलाइन का कहना है कि नेटवर्क अब लगभग बहाल हो चुका है, 91% फ्लाइट्स ऑन-टाइम हैं और अब तक 827 करोड़ रुपए का रिफंड दिया जा चुका है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. इंडिगो संकट का सबसे बड़ा कारण क्या रहा?
गलत क्षमता आकलन, ज्यादा शेड्यूल और संसाधनों की कमी को मुख्य वजह माना जा रहा है।
Q2. क्या यात्रियों को मुआवजा मिलेगा?
मामला कोर्ट में है, उम्मीद की जा रही है कि प्रभावित यात्रियों को राहत दी जाएगी।
Q3. DGCA की भूमिका पर सवाल क्यों उठे?
समय पर कार्रवाई न करने और निगरानी में कमी के आरोप लगे हैं।
Q4. आगे ऐसे हालात फिर बन सकते हैं?
सरकार का कहना है कि नए नियम और सख्त निगरानी से भविष्य में ऐसा नहीं होगा।
निष्कर्ष
इंडिगो संकट ने यह साफ कर दिया कि भारत का एविएशन सेक्टर सिर्फ उड़ानें बढ़ाने से नहीं चल सकता। सही प्लानिंग, संसाधनों की ईमानदार जानकारी और समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार की जांच और DGCA पर बढ़ता दबाव इस बात के संकेत हैं कि अब “सब ठीक है” कहकर बात टाली नहीं जा सकती।
यात्रियों की उम्मीद भी यही है कि अगली बार फ्लाइट टिकट बुक करते समय सिर्फ बैग नहीं, भरोसा भी साथ जाए।