- NIA ने दिल्ली ब्लास्ट मामले में शोएब को गिरफ्तार किया।
- शोएब ने आतंकी उमर नबी को घर और सामान का इंतजाम कराया था।
- इस मामले में अब तक 7 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
- NIA अब डॉ. आदिल और डॉ. शाहीन को अल-फलाह यूनिवर्सिटी लेकर जाएगी।
दिल्ली में हुए ब्लास्ट केस को लेकर देशभर में terror investigation काफी तेजी से चल रही है और इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। कहानी में सस्पेंस, प्लॉट ट्विस्ट और कैरेक्टर्स इतने ज्यादा हैं कि किसी क्राइम वेब सीरीज के डायरेक्टर को तो यह केस मिल जाए, तो कम से कम 3 सीजन तो आराम से बना देगा।
पहले लगा था मामला छोटा है, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो हर दिन नए-नए चेहरे सामने आने लगे। ताजा जानकारी के मुताबिक, National Investigation Agency (NIA) ने शोएब नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह वही शोएब है जो फरीदाबाद के धौज गांव का रहने वाला था और अल-फलाह यूनिवर्सिटी में वार्ड बॉय की नौकरी कर रहा था।
कौन है शोएब और उसकी क्या भूमिका रही?
शोएब कोई मास्टरमाइंड नहीं था, लेकिन कहानी में उसकी भूमिका काफी गंभीर मानी जा रही है। उस पर आरोप है कि उसने सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर नबी को नूंह में रहने के लिए घर दिलाया और उसे सामान लाने-ले जाने में मदद की।
उसकी भूमिका इस प्रकार बताई जा रही है:
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उमर नबी को अपनी साली के घर में किराये पर कमरा दिलाना
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सामान लाने-ले जाने में मदद करना
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नूंह में ठिकाना बनवाना
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यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों और जगह-जगह का पता उपलब्ध कराना
10 नवंबर को हुए धमाके से पहले उमर लगभग 10 दिन उसी किराए वाले घर में रहा। धमाके वाले दिन वह सीधे नूंह से दिल्ली गया था।
यह गिरफ्तारी इस केस की सातवीं गिरफ्तारी है, जो दिखाती है कि केस जितना दिख रहा है उससे कहीं ज्यादा गहरा है।
कहानी के बाकी किरदार: डॉक्टर, यूनिवर्सिटी और संदिग्ध नेटवर्क
हर दिन जांच आगे बढ़ रही है और अब ध्यान जा रहा है डॉ. आदिल अहमद और डॉ. शाहीन सईद की गतिविधियों पर।
डॉ. आदिल और उमर नबी: दोस्ती, मुलाकातें और प्लानिंग
तथ्यों से सामने आया है कि आदिल और उमर नबी कई साल से दोस्त थे। दोनों जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सरकारी डॉक्टर थे। बाद में उनकी नौकरी अलग-अलग जगहों पर हो गई — लेकिन संपर्क बना रहा, और शायद इस संपर्क ने इस पूरी घटना की नींव रखी।
दोस्ती की Timeline (Table में समझिए):
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| सरकारी सेवा के दौरान | आदिल और उमर की दोस्ती शुरू |
| नौकरी बदलने के बाद | संपर्क बरकरार |
| कई बार आदिल अल-फलाह यूनिवर्सिटी आया | उमर और अन्य आरोपियों से मुलाकात |
| केस के खुलासे के बाद | गिरफ्तारियां शुरू |
आदिल का किरदार सबसे ज्यादा उलझा हुआ है, क्योंकि कहा जा रहा है कि उसी ने फतेहपुरा तगा और धौज गांव में विस्फोटक जुटाने की सलाह दी थी। वजह यह बताई गई कि वहां बिना कागज़ी औपचारिकताओं के किराए पर रहना और सामग्री जुटाना आसान था।
डॉ. शाहीन की भूमिका — दिमागी खेल?
जांच एजेंसियां अब शाहीन की गतिविधियों की जांच कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक शाहीन यूनिवर्सिटी की करीकुलम कमेटी में तीसरे नंबर पर थी और उस पर आरोप है कि वह लोगों को भर्ती करने और ब्रेनवॉश करने का काम करती थीं।
NIA जल्द ही यूनिवर्सिटी में घटनास्थल की पहचान करवाते हुए उनसे पूछताछ करेगी।
मुजम्मिल शकील — विदेशी हैंडलर और विस्फोटक सामग्री
कहानी यहाँ और पेचीदा हो जाती है। जांच में सामने आया कि मुजम्मिल शकील को विदेशी हैंडलर से 42 वीडियो भेजे गए थे।
इन वीडियो में सिखाया गया था:
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विस्फोटक कैसे तैयार करें
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सामग्री कहाँ से मिलेगी
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कौन सा प्रोसेस सुरक्षित और गुप्त है
NIA ने उसे लेकर फरीदाबाद, गुरुग्राम के सोहना और फतेहपुर तगा में कई जगहों पर जांच की। उसने FAQ स्टाइल में कुछ चीज़ें मानी भी, जैसे:
“हाँ, अमोनियम नाइट्रेट यहीं से लिया था… दुकान वही थी… बिल मत पूछो।”
इस केस की अब तक की प्रगति
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| गिरफ्तारियाँ | 7 |
| मुख्य संदिग्ध | उमर नबी (मृत), आदिल, मुजम्मिल |
| नेटवर्क | अल-फलाह यूनिवर्सिटी और बाहरी लोकेशन से जुड़ा |
| सबूत | हथियार, विस्फोटक सामग्री, विदेशी वीडियो |
पुलिस क्या देख रही है?
जांच के मुख्य बिंदु:
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यूनिवर्सिटी में कौन-कौन शामिल था
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कब, किससे और क्यों मुलाकात हुई
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विस्फोटक विश्वविद्यालय के अंदर कैसे लाए गए
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विदेशी कनेक्शन कितना मजबूत था
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q: शोएब आखिर गिरफ्तार क्यों हुआ?
A: क्योंकि उसने आरोपी उमर नबी को ठिकाना दिलाया और सामान लाने-ले जाने में मदद की।
Q: क्या यह यूनिवर्सिटी आतंकी मॉड्यूल का अड्डा थी?
A: जांच जारी है, लेकिन कई गतिविधियाँ संदिग्ध नजर आ रही हैं।
Q: क्या अब और गिरफ्तारियां होंगी?
A: काफी संभावना है।
Q: विदेशी हैंडलर की पहचान हुई क्या?
A: अभी जांच में।
Conclusion: कहानी अभी खत्म नहीं — असली सच अभी सामने आना बाकी
देश की सुरक्षा एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। हर दिन नए रहस्य सामने आ रहे हैं। यह केस दिखाता है कि अपराध कभी भी अचानक नहीं होता, बल्कि योजनाएं धीरे-धीरे बनती हैं, रिश्तों में छिपी होती हैं और मौका मिलते ही सामने आती हैं।
हो सकता है कुछ लोग अब भी सोच रहे हों —
“यार ये कहानी फिल्म में क्यों नहीं बनाई गई?”
लेकिन बेहतर होगा पहले सच सामने आए, पूरी जांच पूरी हो, और फिर अगर फिल्म बनती है तो दर्शक शायद पहली बार कहेंगे —
“यह कहानी नहीं, चेतावनी है।”